कुलधरा गाँव का इतिहास | Kuldhara Village

कुलधरा गाँव का इतिहास: दोस्तों यह दुनियाँ बहुत बड़ी है जिसमें 180 से भी ज्यादा देश हैं जिनमें से एक हमारा देश है भारत और भारत भी कोई छोटा नहीं यह बहुत बड़ा है जिसके हर स्टेट में कुछ ना कुछ राज छुपे हुए हैं। कहीं पर मंदिरों की ऐसी कहानियां मिलती है जिनके बारे में हम जितना जाने उतना ही उसमें उलझते जाते हैं। कहीं पर पुराने खंडर बन चुके किलों की भूतियाँ कहानियाँ देखने को भी मिलती हैं।

ऐसे ही आज हम एक गाँव की बात करने वाले हैं जिसको haunted place kuldhara village के नाम से जाना जाता है। इस कुलधरा गाँव के साथ ऐसी बातें जुड़ी हुई है जिन पर आज के वक़्त में नामुमकिन से या फिर अंधविश्वास सा लगता है। मगर इसके साथ जुड़ी हुई सभी बातें सच्ची होने का इतिहासकार भी दावा करते हैं।

कुलधरा गाँव के साथ जुड़ी भूतियाँ बातें कितनी सच्ची है या नहीं यह तो बाद कि बात है मगर आज हम इसके साथ जुड़े इतिहास, इस गाँव के भूतियाँ होने की बातें, कुलधरा गाँव कैसे जाएं जैसी सभी जानकारी आपके साथ साँझा करेंगे। क्योंकि अभी दिन के वक़्त के लिए इस गाँव को पर्यटकों के आने जाने के लिए खोल दिया गया है, जिसके चलते आप यहाँ घूमने जा सकते हैं और यहाँ घूम कर उन सभी बातों को महसूस कर सकते हो जैसा लोग बताते हैं।

 

कुलधरा गाँव का परिचय

 

कुलधरा गाँव राजस्थान के जैसलमेर से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिसको एक श्रापित गाँव माना जाता है जिस वजह से यहाँ कोई भी नहीं रहता और यह कई सालों से ऐसे खंडहर की तरह ही बन कर रह गया है। यहाँ रात को जाने पर बिल्कुल पाबंदी है और इस गाँव के चारों तरफ बाउंडरी लगा दी गयी है तांकि बिना इज़ाजत के कोई इस गाँव में ना जा सके।

हालांकि दिन में यहाँ घूमने आने वालों का आना जाना लगा रहता है मगर यह एक सीमित समय तक ही रहता है रात होते होते इस गाँव मे घूमने आए सभी लोगों को लौट जाना जरूरी होता है। और कहते हैं कि अगर कोई भी इस गाँव मे रात को ठहर गया तो वह किसी हादसे का शिकार हो जाता है या फिर कभी मिलता ही नहीं।

ऐसी ही कई बातें कुलधरा गाँव के साथ जुड़ी हुई है और यहाँ जाने वालों का कहना है कि जब हम यहाँ चलते हैं तो हमारे साथ किसी के चलने का एहसास होता है। कुछ लोग यह तक दावा करते हैं कि लोगों की आवाजों का एहसास, बाज़ार में आने वाली वह सभी आवाज़ें तक सुनाई देती है जो यहाँ कई साल पहले गुंजा करती थी। तो आखिर क्या हुआ एक ऐसे गाँव को जो वह आज खंडहर बनकर रह गया और लोगों द्वारा श्रापित माना जाने लगा

 

कुलधरा गाँव का इतिहास | Kuldhara Village History In Hindi

 

कुलधरा गाँव को श्रापित माना जाता है यह बात तो आप जान गए हो लेकिन इसके पीछे की क्या कहानी है। आखिर क्या कुलधरा गाँव का इतिहास है जिस वजह से आज यहाँ कोई भी रात के वक़्त जाने से डरता है और इतने साल बीत जाने के बाद भी आज यह कुलधरा गाँव खँडहर बनकर पड़ा है। इसके बारे में जानने के लिए इसके इतिहास को जानना होगा जिससे पता चलेगा कि कुलधरा गाँव ऐसा होने से पहले क्या था और क्या हुआ जो यह गाँव श्रापित हो गया।

इतिहासकारों की माने तो कुलधरा गाँव और उसके आसपास के 84 गाँव में पालीवाल ब्रह्मण रहा करते थे, इन सभी गाँव को बसाने वाले भी ब्राह्मण लोग ही थे। मगर यहाँ की रियासत के जो राजा थे उनकी वजह से ही यह गाँव आज श्रापित माना जाता है। यहाँ की रियासत के राजा का नाम स्लीमसिंह था, और उसका इन गाँव मे पूरा दब दबा था। लोगों से अधिक कर वसूलना लोगों पर अत्याचार करना उसका काम ही हो गया था।

एक दिन स्लीमसिंह जब कुलधरा गाँव मे आया तो इसकी नज़र मुखिया की बेटी पर पड़ी और वह उसको पहली नज़र में ही पसंद आ गईं। स्लीमसिंह मुखिया की बेटी में इस कदर पागल सा हो गया कि उसको किसी भी हाल में अपना बनाने के लिए तड़पने लगा। उसने मुखिया की बेटी से शादी करने के लिए ब्राह्मणों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।

जब इससे भी बात ना बनी तो एक दिन उसने मुखिया के घर धमकी भरा संदेश भेज दिया कि यदि 7 दिन के अंदर स्लीमसिंह को मुखिया की बेटी नहीं मिली तो वह पूरे गाँव के लिए ठीक नहीं होगा वह गाँव पर हमला कर लड़की को उठा कर ले जाएगा। जैसे कि आज के समय मे गाँव की लड़की की इज़्ज़त पूरे गाँव की होती है वैसे ही उस समय भी गाँव की इज़्ज़त का सवाल हो गया था जिस कारण पूरे गाँव मे डर का माहौल बन गया।

फिर गाँव मे पंचायत बैठाई गयी इस बात पर चर्चा करने के लिए जिसमें आस पास के 84 ब्राह्मणों के गाँव के मुखिया शामिल हुए, उस पंचायत में सभी गाँव ने मिलकर इज़्ज़त बचाने के लिए गाँव को छोड़ देने का फैंसला किया। गाँव छोड़ कर तो सब ब्राम्हण लोग चले गए मगर जाते हुए एक श्राप देकर चले गए कि कोई भी कभी इस गाँव में नहीं बस पाएगा। यह गाँव उजड़ कर खंडहर हो जाएगा जिस श्राप की वजह से आज भी यह गाँव वैसे ही पड़ा है।

 

कुलधरा गाँव का पर्यटक स्थल बनना

 

जब कुलधरा गाँव के सभी लोग इस गाँव को छोड़कर जाते हुए इसे श्राप देकर गए तो यह गाँव उजाड़ हो गए और राजा की रियासत भी खत्म हो गयी। कहा जाता है कि उसके बाद कोई गाँव मे नहीं बस पाया जो भी यहाँ रहने के लिए आता वह गायब हो जाता। और इसके साथ धीरे धीरे कहानियाँ जुड़ने लगी। आस पास के सभी गाँव मे फिरसे लोग बसने लगे मगर कुलधरा गाँव आज भी वीरान पड़ा है। जहाँ लोगों को उन ब्राह्मण लोगों की आवाज़ें तक सुनाई देती है।

इस वजह से सरकार ने इसको दिन में घूमने के लिए एक पर्यटक स्थल बना दिया, और रात होते ही इसे बंद कर दिया जाता है। यहाँ रहकर देख भाल करने वाले भी रात होने से पहले इस गाँव को छोड़ कर चले जाते हैं। आज यहाँ सैंकड़ों की गिनती में लोग भी घूमने आते हैं यदि आप भी जाना चाहो तो यहाँ पर जा सकते हो। 

 

कुलधरा गाँव में घूमने जाने का सही समय

 

यदि आप कुलधरा गाँव मे घूमने के लिए जाना चाहते हैं तो आप को तब जाना चाहिए जब थोड़ा सर्दी का मौसम होता है, क्योंकि यह गाँव एक रेगिस्तान जैसे इलाके में स्थिति है। इसलिए गर्मियों के मौसम में यहाँ बहुत ज्यादा गर्मी होगी

इसके अलावा आप यह हमेशा ध्यान रखें कि आप सुबह लगभग 9-10 बजे तक वहाँ पहुँच जाएं जिससे आप अच्छे के पूरे गाँव मे घूम सकते हैं। क्योंकि कुलधरा गाँव घूमने के लिए खुले रहने का समय सुबह 8 बजे से शाम के 6 बजे तक है।

6 बजे के बाद यहाँ रुकने वाला पूरा स्टाफ गांव का प्रवेश दिवार बंद करके चला जाता है। यहाँ अंदर घूमने जाने के लिए आपसे 10 Rupaye Per Person लिए जाएंगे। यदि आप कार या बाइक से अंदर जा रहे हैं तो उसके लिए आपसे 20-50 रुपये ज्यादा लिए जाएंगे।

 

कुलधरा गाँव कैसे जाएँ

 

कुलधरा गाँव जाने के लिए आपको सबसे पहले राजस्थान के जैसलमेर में आना होगा यहाँ आने के लिए आप किसी भी चीज़ से आ सकते हैं। यहाँ से आपको कुलधरा जाने के लिए सरकारी बस, टेक्सी और ऑटो भी मिल जाएंगे। जो आपको जैसलमेर से 25 किलोमीटर दूर कुलधरा गाँव मे ले जाएंगे।

यदि आप खुद के मोटोरवाहिकल पर आ रहे हैं तो भी आप पहले जैसलमेर जाएं और यहाँ से आप बहुत आसानी से कुलधरा गाँव के प्रवेश द्वार तक पहुंच जाएंगे।

 

कुलधरा गाँव के पास रहने का प्रबंध

 

यदि आप किसी दूर के इलाके से कुलधरा गाँव घूमने आने वाले हैं तो आपके मन मे यह सवाल जरूर होगा कि आप वहां कहाँ पर रुक सकते हैं और कहां से खाने पीने के प्रबंध कर सकते हैं। हम आपको बता दें कि कुलधरा गाँव से 25 किलोमीटर जो जैसलमेर है यहाँ आपको रहने और खाने के लिए सभी सुविधाएं मिल जाएंगी। जैसलमेर एक बहुत बड़ा शहर है जहाँ आपको छोटे से लेकर बड़े होटल और रेस्टुरेंट मिल जाएंगे। जहाँ आप ठहर ओर खा सकते हैं।

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तो दोस्तों यह थी कुलधरा गाँव से जुड़ी कुछ बातें और कुलधरा का इतिहास, जो आज एक पर्यटक स्थल से महशूर है। हमें उम्मीद है कि आपको यह जानकारी बेहद पसन्द आयी होगी। यदि आप यहाँ घूमने जाने का मन बना रहे हैं तो आपको ज़ुरूर जाना चाहिए यहाँ तक पहुंचने में आपको बिल्कुल परेशानी नहीं होगी क्योंकि यहाँ आने जाने के लिए पूरा प्रबंधन है। और यदि आप यहाँ रुकना भी चाहें तो जैसलमेर में आप रुक सकते हो धन्यवाद।

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