भील जनजाति सामान्य ज्ञान | Rajsthan Bhil Tribe Gk

भील जनजाति सामान्य ज्ञान : भारत में अनेक प्रकार की जातियाँ और जनजाति पाई जाती है, जो सब अपने अपने तरीके से और रिवाजों से रहती है लेकिन फिर भी भारत मे सब मिलकर रह रहे हैं यही तो मेरे भारत देश की खासियत है जहाँ सभी जातियों को अपने अपने तरीके स्व रहने की आजादी है। लोगों के रीति रिवाज अलग अलग होते हुए भी वह एक ही देश मे मिलजुल कर रह रहे हैं।

 

आज हम ऐसी ही एक जनजाति के बारे में बात करने वाले जी जनजाति का नाम भील जनजाति है, राजस्थान की भील जनजाति से जुड़ा कुछ तथ के बारे में जानेंगे जिसके बारे में इससे पहले शायद आप ना जानते हों। भील जनजाति बाकी जातियों से अलग और भारत की सबसे पुरानी जनजाति है।

जिसका जिक्र वेदों और पुराणों में भी मिलता है। भील जनजाति तीरंदाजी के लिए जानी जाती है, और पुराने समय मे यह अपनी तीरंदाजी से ही राजा महाराजाओं की सुरक्षा करते थे और उनके राज़ को बचा कर रखना और अपना रास कायम रखते थे।

 

भील जनजाति सामान्य ज्ञान

 

  • भील जनजाति राजस्थान की दूसरी सबसे बड़ी जनजाति है।
  • भील शब्द की उतपति द्रविड़ भाषा के एक शब्द बिल से हुई जिसका शाब्दिक अर्थ कमान है, भील जनजाति तीर कमान चलाने में सबसे आगे थी इसलिए इस जनजाति को भील का नाम दिया गया।

 

  • राजस्थान में भील जनजाति उदयपुर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, भीलवाड़ा और सिरोही आदि जिले में निवास करती है।

 

  • इस जनजाति के बडे गाँव को पाल कहा जाता है।

 

  • इस जनजाति के छोटे गाँव को फला कहा जाता है।

 

  • भीलों के घर को कु अथवा टापरा कहा जाता है।

 

  • इतिहासकार टॉलमी द्वारा भीलों को फिलाइट कहा गया है जिसका अर्थ तीरंदाज है।

 

  • मैदानों पर रहने वाले भीलों को बागड़ी नाम से पुकारा जाता है।

 

  • वन क्षेत्र में रहने वाले इस जनजाति के लोगों को बनपुत्र के नाम से पुकारा गया है। 

 

  • यह जनजाति राजस्थान की सबसे पुरानी जनजाति मानी जाती है।

 

  • इनके द्वारा भीली, मेवाड़ी और वागड़ी भाषा मे बोला जाता है।

 

  • भील लोग परंपरागत रूप से तीरंदाज होते हैं।

 

  • पहाड़ियों पर रहने वाले इस जनजाति के लोगों को पालवी कहा जाता है।

 

  • भीलों के गाँव के मुखिया को गमेती कहा जाता है।

 

  • भीलों के कुल देवता टोटम देव हैं।

 

  • इस जनजाति में बहुत एकता है, ढोल बजाते ही यह अपने शास्त्र लेकर एक जगह पर इकट्ठा हो जाते हैं।

 

भील जनजाति सामान्य ज्ञान इतिहास

कच्छी राजपूत जनजाति 4 से 10वीं शताब्दी के दौरान उपजाऊ भूमि की तलाश में अपनी मातृभूमि पंजाब और गुजरात से मालवा क्षेत्र में चली गई। राजपूतों, जिनके आदमियों ने भारी कवच ​​पहना था और अपने घोड़े चढ़ाए थे, ने जल्दी से ऊपरी सिंधु घाटी पर अधिकार कर लिया।

कच्छी राजपूतों ने सर्दियों में अपने झुंडों को एक चरागाह से दूसरे चरागाह में स्थानांतरित करते हुए, पारगमन का अभ्यास किया। उन्होंने केवल आपस में शादी की, हालांकि उन्होंने 8 वीं शताब्दी के बाद से पड़ोसी जनजातियों में शादी कर ली, और भयंकर स्वतंत्र योद्धाओं के रूप में जाने जाने लगे।

14 वीं शताब्दी के दौरान, राजपूतों ने दिल्ली और चित्तौड़ के साथ युद्ध लड़े, और राजपूतों और मेवाड़ के बीच निरंतर शत्रुता बनी रही। राजपूत मालवा क्षेत्र में Bhil Tribe से भिड़ गए, जिसे उनके द्वारा स्थापित किया गया था।

Conclusion

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