महाशिवरात्रि पर निबंध 2022 ~ Essay on mahashivratri

भारत त्योहारों का देश है यहाँ आये दिन कोई न कोई त्योहार मनाया जाता है हर त्योहार की अपनी मान्यता है कुछ त्योहार धर्म से जुड़े होते हैं तो कुछ इतिहास से। ऐसे में त्योहारों की बात हो तो उनमे से एक ऐसा पर्व महाशिवरात्रि है जिसके बारे में कौन नही जानता। इस त्योहार को भारत के साथ अन्य देशों में भी मनाया जाता है।

इसके साथ हमारा भारत एक धार्मिक देश है यहाँ अलग अलग धर्मों के लोग रहते हैं तो सब अपने अपने धार्मिक त्योहार मनाते हैं ओर गर महाशिवरात्रि की बात को जाए तो यह हिन्दू धर्म के लोगों द्वारा मनाया जाने वाला त्योहार है क्योंकि महाशिवरात्रि का सबंध भगवान शिव से है, मगर यहाँ रहने वाले सभी धर्म के लोग इस त्यौहार को मिलकर मनाते हैं।

महाशिवरात्रि के पर्व के बारे में तो आप जानते हो और हर साल मनाते भी होंगे लेकिन क्या आप यह जानते हो कि महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है अगर नही जानते तो यह पोस्ट पढ़ने के बाद आप जान जाओगे की महाशिवरात्रि के साथ क्या कथा जुड़ी हुई है। 2021 में महाशिवरात्रि 11 मार्च को थी अब इसके बाद 2022 में महाशिवरात्रि कब है?

 

2020 में महाशिवरात्रि कब है, महाशिवरात्रि, महाशिवरात्रि क्यों  मनाते हैं, महाशिवरात्रि कब है

 

महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

 

भारत के हर त्योहार की तरह महाशिवरात्रि पर्व से भी बहुत मान्यतायें जुड़ी हुई है  अलग अलग धारणाएं है कि महाशिवरात्रि क्यों मनाया जाता है।

यह माना जाता है कि यह उस रात्रि की याद में मनाई जाती है जब भगवान शिव ने पूरी सृष्टि की रक्षा के लिए विष को अपने कंठ में उतार लिया था विष इतना खतरनाक था कि भगवान शिव दर्द से बहुत पीड़ित हो रहे थे।

उनको चिक्तिसाओं ने रात भर जागते रहने को कहा, इस लिए उस रात्रि को शिव के जागते हुए रहने के लिए देवताओ ने उनकी सहायता की पूरी रात इस लिए यह माना जाता है कि महाशिवरात्रि उस रात को याद कर मनाया जाता है।

 

एक मान्यता यह भी है कि इस दिन भगवान शिव की शादी हुई थी इस दिन शिव ने अपना वैराग्य जीवन छोड़ गरसथ जीवन मे प्रवेश किया था। इस दिन को भगवान शिव के विवाह  उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।

 

इस दिन को भगवान शिव के जन्मदिन उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे और इस दिन पहली बार शिवलिंग की पूजा की गई थी।

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महाशिवरात्रि से जुड़ी कहानी

दोस्तों एक बार की बात है जब एक गांव में एक परिवार रहता था उस परिवार में एक साँस ओर एक बहु थी और उनके अलावा दो पुरुष भी रहते थे जो साँस का बेटा ओर पति थे।

एक दिन महाशिवरात्रि व्रत वाले दिन बहु भगवान शिव की पूजा अर्चना करने के लिए बाहर जाने लगी, परंतु तभी उसकी साँस बोली “सज्ज ध्हज्ज कर यह थाली सजा कर कहाँ जा रही हो घर का काम और खेत का काम देखने तेरा बाप आएगा क्या” बहु बोली नहीं माँ जी मैं तो आज महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा करने जा रही थी।

साँस ने कहा कोई ज़रूरत नहीं है यह सब करने की ओर जाकर काम पर लग जाओ, बहु उदास मन से पूजा की थाली को वापस रख कर खेत का काम देखने खेत की तरफ निकल गयी और रास्ते में पूजा करने जाते लोगों को देख खेत मे पहुँच गयी।

वहाँ जाकर वह इस बात से दुखी होकर रोने लगी और खुद को कोसने लगी कि में कितनी अभागन हूँ जो आज महाशिवरात्रि के दिन भी भगवान शिव जी की पूजा करने नहीं जा सकी।

तभी उसे अपने सामने थोड़ा दूर एक रोशनी सी दिखाई देती है और फिर गायब हो जाती है वह देखती है कि सामने से एक साधु ओर साध्वी चले आ रहे हैं।

यह देखते ही वो आँसू पूछने लगती है परंतु जैसे उन दोनों ने इसके दिल मे छुपे दर्द को देख लिया होता है वह इसके पास चले आते हैं और उसके रोने की वजह पूछते हैं।

बहु उन दोनों को पूरी बात बताते हुए अपने को इस बात से अभागन मानते हुए रोने लगती है कि वह आज महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करने नहीं जा सकी।

यह देख कर वह दोनों उसे चुप कराते हैं और अपने पास से बहुत सारा सोना उसे देकर कहते हैं की जाओ बेटा यह सोना लो और घर जाकर भगवान शिव की पूजा करो यह खेत का काम भी हम देख लेंगे। यह देख कर बहु खुशी से झूम उठती है और घर आती है।

घर मे जब उसकी सास उससे पूछती है कि यह सोना कहाँ से लाई ओर खेत का काम करके आयी या ऐसे ही आ गयी तो बहु बिना कुछ छुपाये सब सच बता देती है।

सास यह देखने जब तक खेत मे जाती है तो वहाँ कोई नहीं होता और वहाँ पर हीरों ओर गहनों की फसल उगी होती है जिसे देख कर सास खुश हो जाती है और अपनी बहू के साथ भगवान शिव की पूजा करती है।

मगर सास के दिल में कोई श्रद्धा नहीं होती वह सिर्फ अपने लालच को पूरा करने और बहित सारा धन दौलत पाने के लिए यह सब करती है। और पूरा एक साल बीत जाता है और फिरसे वही महाशिवरात्रि वाला रिन आता है।

वह खेतों में जाकर रोने लगती है तभी वहाँ वही साधु ओर साधवी आते हैं वह उससे पूछते हैं कि माता जी आप क्यों रो रही हो तो वह उनसे झूठी कहानी सुना देती है को मेरी बहु ने मेरे साथ यह यह करके घर से निकाल दिया और पूजा नहीं करने दी।

सास यह सब धन दौलत पाने के लिए कर रही होती है जिसको वह साधु के रूप में भगवान शिव भाँप जाते हैं। इसलिए वह उसे सोना देकर वैसे ही घर को लौटा देते हैं जब वह घर पहुंचती है तो उसके शरीर पर छाले होने लगते हैं। जिसे देख बहु ओर सास भगवान शिव को पुकारने लगते हैं तभी वहां आवाज़ गूंजती हुई आती है।

माता जी आपने लालच किया इसलिए आपको उसका यह फल मिला जबकि आपकी बहु के मन में सच्ची श्रद्धा थी। यह सुनकर बहू भी अपनी सास के गुनाह को माफ करने की गुहार लगाने लगती है और भगवान शिव उसको माफ कर देते हैं।

यह कहानी थी भगवान शिव के दिन महाशिवरात्रि से जुड़ी हुई, तो दोस्तों उम्मीद है यह कहानी आपको पसंद आई होगी।

 

महाशिवरात्रि कब मनाई जाती है?

महाशिवरात्रि के दिन शिव के भक्त उपवास रखते हैं और भगवान शिव की पूजा उपासना करते है। शिवरात्रि तो हर महीने में आती है लेकिन महाशिवरात्रि पर्व साल में एक बार भारतीय महीने फ़ाल्गुन में  कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। 2021 में 11 मार्च को महाशिवरात्रि मनाई गई थी

 

2022 में महाशिवरात्रि कब है

2022 में महाशिवरात्रि का त्योहार 1 मार्च दिन मंगलवार को मनाया जाएगा।

 

इस पोस्ट में आपने जाना कि महाशिवरात्रि क्यों मनाया जाता है और 2022 में महाशिवरात्रि कब है। अगर इस पोस्ट से सबंधित आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो कॉमेंट कर हमें जरूर बताएं।

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