Somnath Temple History In Hindi | सोमनाथ मंदिर इतिहास

सोमनाथ मंदिर इतिहास: दोस्तों हमारा भारत देश एक ऐसा देश है जहाँ पर बहुत से धार्मिक स्थान जैसे मंदिर मस्जिदें पाई जाती है और हर धार्मिक स्थान का अपना एक इतिहास है। आपने बहुत से मंदिरों के बारे में सुना होगा जैसे बद्रीनाथ मंदिर, केदारनाथ मंदिर और जगन्नाथ मंदिर ऐसे ही एक मंदिर का इतिहास आज हम आपके सामने लेकर आये हैं। इस मंदिर का नाम सोमनाथ मंदिर है जो कि गुजरात राज्य में स्थित है।

आज के इस आर्टिकल में हम सोमनाथ मंदिर का इतिहास, सोमनाथ मंदिर का इतिहास हिंदी में, सोमनाथ महादेव मंदिर,सोमनाथ मंदिर पर निबंध, सोमनाथ मंदिर की तस्वीरें, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, आरती का समय, कैसे पहुंचें, सोमनाथ के योग्य स्थान देखें , गेस्ट हाउस सुविधाएं, घूमने का सबसे अच्छा समय, सोमनाथ मंदिर के बारे में जानकारी हिंदी, सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट इन सभी बातों के बारे में बताने वाले हैं और हमें उम्मीद है कि यह आपको जरूर पसंद आएगा तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं।

 

सोमनाथ मंदिर का परिचय

 

ऐसे तो सभी मंदिरों को पवित्र और प्रतिष्ठित माना जाता है परंतु सोमनाथ मंदिर को भारत में सबसे प्रतिष्ठित और पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है। सोमनाथ मंदिर को सोमनाथ महादेव मंदिर कर नाम से जाना जाता है क्योंकि यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित 12 प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से एक है।

यह मंदिर गुजरात के सबसे पुराने तीर्थ स्थलों में से भी एक है।  ‘सोमनाथ’ शब्द का अर्थ है ‘चंद्रमा के भगवान’, आपने भगवान शिव की सभी ऐसी तस्वीरें देखी होंगी जिसमें उनके सिर पर चंद्रमा सी आकृति वाला कुछ पहना होता है। इसलिए भगवान शिव का जिक्र करते “‘चंद्रमा के भगवान” नाम से करते हुए हुए जाना जाता है।

 

Somnath Temple History In Hindi | सोमनाथ मंदिर का इतिहास

 

शिव के 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से एक सोमनाथ मंदिर सुंदर वास्तुकला का नमूना है। अनन्त तीर्थ के रूप में जाना जाता है जो एक सबसे प्राचीन तीर्थ स्थान भी माना जाए है। ऐसा माना जाता है कि यह वह स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण ने अपने हरे रंग को समाप्त किया और फिर स्वर्गीय निवास के लिए चले गए। श्रीमद्भागवत, स्कंदपुराण, शिवपुराण और ऋग्वेद नामक सभी वेदों में भी सोमनाथ का उल्लेख मिलता है।

 

इतिहासकारों के अनुसार सोमनाथ महादेव मंदिर प्राचीन काल से तीर्थ स्थान रहा है, इसको तीन नदियों कपिला, हिरण और पौराणिक सरस्वती का संगम कहा जाता है क्योंकि यह तीनों नदियाँ यहाँ आकर मिलती है। 11वीं शताब्दी में रावण को चांदी, कृष्ण को लकड़ी और सोलंकी को पत्थर राजपूतों ने बनाया था।

 

सोमनाथ मंदिर पर हमले – सोमनाथ मंदिर हमले

 

जैसे कि आप सभी जानते हो समय समय पर युद्ध और हमले होते रहे और उन युद्धों की भेंट चढ़ते रहे हमारे धार्मिक स्थान, जब मुस्लिमों का राज आया तो मंदिरों को गिरा दिया गया और जब इनका राज गया तो मस्जिदों को मिटा दिया गया। इतिहास में लिखे अनुसार, सोमनाथ मंदिर को मुस्लिम शासकों द्वारा लगभग 17 बार नष्ट किया गया था जिनमें कुछ प्रमुख समय का वर्णन इस तरह से है – 

1024 ईस्वी में महमूद गजनी के द्वारा पहली दफा मंदिर पर हमले की शुरुआत की गई,1299 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी नामक मुस्लिम शासक द्वारा, 1451 ईस्वी में मोहम्मद बेगड़ा और अंत में 1702 ईस्वी में औरंगजेब द्वारा। इतिहासकारों और प्राचीन ग्रन्थों के अनुसार एक समय में, मंदिर इतना समृद्ध था कि इसमें 300 संगीतकार, 500 नर्तक और 300 परिचारक थे।

 

कहा जाता है कि महमूद गजनी के साथ दो दिन की लड़ाई के बाद, 70,000 मंदिर का बचाव करने वाले नायक मारे गए थे। महमूद ने मंदिर की संपत्ति लूट कर उसे नष्ट कर दिया इस प्रकार विनाश और पुनर्निर्माण की एक प्रणाली शुरू हुई जो सदियों तक जारी रही। मुस्लिमों के शासन में मंदिर को नष्ट किया जाता रहा और हिन्दू राजाओं के राज में फिर से निर्मित किया जाता रहा।

 

सोमनाथ मंदिर के नौ निर्माण – सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण

 

 सोमनाथ महादेव मंदिर कई बार लोगों के पुनर्निर्माण की भावना को ध्यान में रखते हुए बनाया गया था। स्वतंत्रता से पहले, प्रभास पाटन – जो अब वेरावल नाम से जाना जाता है – जूनागढ़ राज्य का हिस्सा था। यहाँ के शासक द्वारा 1947 में पाकिस्तान में शामिल होने का फैसला किया गया परंतु भारत द्वारा उसके इस फैसले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया गया जिसके बाद इस राज्य को भारत का हिस्सा बना फ़िया गया था।

 

12 नवंबर 1947 को उप प्रधान मंत्री सरदार पटेल राज्य में स्थिरता बनाये रखने के लिए भारतीय सेना का मार्गदर्शन करने के लिए जूनागढ़ आए और सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का भी आदेश दिया। आधुनिक मंदिर 1947 में सरदार पटेल के आदेश से बनाया गया था, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर के खंडहरों का दौरा किया था। जब उन्होंन सोमनाथ महादेव मंदिर को खंडहर बन चुकी हालत में देखा तो उन्होंने इस मंदिर के पुर्ननिर्माण के आदेश दे दिये जिसके बाद इसको फिरसे बनाया गया।

 

सोमनाथ मंदिर स्थापना दिवस

 

11 मई 1951 को उस वक़्त के राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन ने किया गया था। इसलिए हर 11 मई के दिन सोमनाथ मंदिर में सोमनाथ महादेव की साज-सज्जा सहित कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जिसमें महापूजा, ध्वजारोहण, यज्ञ सहित सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, यह नज़ारा बहुत अलौकिक ओर देखने वाला होता है। 11 मई को सोमनाथ मंदिर स्थापना दिवस बहुत उत्साह से मनाया जाता है।

 

सोमनाथ में घूमने की जगह 

 मंदिर की समुद्री सुरक्षा दीवार पर भी देखा जा सकता है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि सोमनाथ मंदिर एक ऐसा स्थान है जहाँ तट के साथ अंटार्कटिका तक एक सीधी रेखा में कोई भूमि नहीं है। सोमनाथ मंदिर के अलावा, सोमनाथ अपने समुद्र तटों, संग्रहालयों और अन्य आकर्षणों के लिए भी लोकप्रिय है।

यहाँ लोग सोमनाथ मंदिर में भगवान शिव के दर्शन करने के साथ घूमने भी आते हैं यहाँ के नजारे देखने के लिये दूर दूर से लोग इस सोमनाथ मंदिर के दर्शनों के लिए आते हैं, सोमनाथ के दर्शनीय स्थल इस प्रकार हैं।

रुद्रेश्वर मंदिर, परशुराम मंदिर, गीता मंदिर, कामनाथ महादेव मंदिर, भालका तीर्थ, वल्लभघाट, सूर्यास्त बिंदु, त्रिवेणी संगम मंदिर, पंच पांडव गुफा, सूर्य मंदिर, सोमनाथ संग्रहालय, जूनागढ़ गेट और सोमनाथ बीच यह सभी सोमनाथ मंदिर के पास घूमने की जगाहें हैं। 

 

 सोमनाथ महादेव मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय

 

यह सुमंदर तट पर बसा हुआ शहर है जिसके कारण सोमनाथ में साल भर नमी और थोड़ा ठंडा मौसम रहता है। मगर फिर भी जैसे कि आप जानते हैं घूमने का मज़ा तो सर्दी के मौसम में ही आता है इसलिए सोमनाथ मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी के ठंडे महीनों में है।  हालाँकि, यह स्थान पूरे वर्ष खुला रहता है, आप जब चाहें तभी आकर यहाँ भगवान शिव के मंदिर सोमनाथ के दर्शन कर सकते हो और यहाँ ओर अन्य स्थानों को देख और घूम सकते हो।

शिवरात्रि और कार्तिक पूर्णिमा यहाँ बहुत उत्साह के साथ मनाई जाती है।  इन त्योहारों के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। इसलिए यदि आप भी इस स्थान की यात्रा को यादगार बनाना चाहते हैं तो आप इस समय मे ज़रूर आएं यहाँ का नज़ारा आप कभी नहीं भुला पाएंगे। 

सोमनाथ महादेव आरती का समय: सुबह 7 बजे, दोपहर 12 बजे और शाम 7 बजे को होता है, साउंड एंड लाइट शो: सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक। यहाँ प्रवेश: नि: शुल्क है। (ध्वनि और प्रकाश शो के लिए प्रति व्यक्ति 25)

 

सोमनाथ मंदिर में अतिथि गृह सुविधा

 

तीर्थयात्री श्री सोमनाथ ट्रस्ट की गेस्ट हाउस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं, यदि आप किसी दूर के स्थान से यहाँ पर आते हैं तो उसके लिये आप गेस्ट हाउस में रुक सकते हो। सोमनाथ महादेव मंदिर ट्रस्ट एक वीआईपी गेस्टहाउस, 18 अन्य गेस्ट हाउस और एक सामान्य छात्रावास का रखरखाव करता है।  ट्रस्ट गेस्ट हाउस में कमरों की कुल संख्या 200 से अधिक है। निजी गेस्ट हाउस किराए की सूची निम्नलिखित है।

 

माहेश्वरी समाज गेस्ट हाउस: किराया – रु।  750 से रु.  1400, सागर दर्शन गेस्ट हाउस: किराया – रु।  2000 से रु.  4000, हरि-हर धाम – परिवार के कमरे: किराया – रु।  2000 से रु.  2500 और लीलावती गेस्ट हाउस: किराया – रु।  750 से रु.  1700

यदी आप निजी गेस्ट हाउस में रहना चाहते हैं तो इन सभी रेट लिस्ट को देख लें, बाकी आप वहाँ जाकर कन्फर्म कर सकते हो कि आपको कितने किराए में निजी गेस्ट हाउस मिल जाएगा।

 

सोमनाथ मंदिर कहाँ स्थित है – कैसे पहुँचें सोमनाथ मंदिर

 

 सोमनाथ मंदिर अहमदाबाद से 408 किमी दूर, द्वारका से 233 किमी दूर, जामनगर से 221 किमी. दूर, राजकोट से 197 किमी. दूर, पोरबंदर से 131 किमी. दूर, जूनागढ़ से 94 किमी. दूर, दीव से 83 किमी. दूर और वेरावल से 6 किमी दूर है। आप इन सभी स्थानों की दूरी से अंदाजा लगा सकते हो कि आप सोमनाथ महादेव मंदिर के स्थान से कितना दूर है और आप किस तरफ से आकर आसानी से सोमनाथ मंदिर तक पहुंच सकते हो।

इसके अलावा आप गूगल मैप की मदद लेकर भी देख सकते हैं कि आप किस तरह से सोमनाथ मंदिर तक पहुंच सकते हो। गूगल मैप पर सर्च करने के लिए आप सिर्फ “सोमनाथ महादेव मंदिर” लिख कर भी सर्च कर सकते हैं और इसका पूरा पता इस तरह से ही:- गुजरात के वेरावल में सोमनाथ महादेव मंदिर रॉड इस स्थान का पिनकोड 362268 है। इस पते की मदद से आप बहुत आसानी से सोमनाथ मंदिर तक पहुंच सकते हो।

Last Words:

दोस्तों यह थी सोमनाथ मंदिर के इतिहास से लेकर अब तक कि पूरी जानकारी हमें उम्मीद है कि यह जानकारी आपको पसंद आई होगी, और आप जो भी जानकारी प्राप्त करने के लिए यहां तक पहुंचे हैं वह आपको मिल गयी होगी। यदि आपको कुछ लगता है कि इस पोस्ट में और किसी विषय पर भी लिखना चहिए था तो हमें कमेंट कर ज़रूर बताएँ हम इसके बारे में आपको पूरी जानकारी देंगे धन्यवाद।

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